स्टेच्यू ऑफ वननेस या एकात्मता की प्रतिमा :-
'स्टैच्यू ऑफ वननेस'
भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र मंदिर शहर ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य जी की 108 फीट ऊंची प्रतिमा तैयार की गई है। आठवीं सदी के श्रद्धेय दार्शनिक को इस स्मारकीय श्रध्दांजलि का नाम एकात्मता की प्रतिमा या स्टेच्यू ऑफ वननेस रखा गया है।
108 फीट की ऊंचाई पर खड़ी यह विस्मयकारी बहु-धातु मूर्तिकला,आदि शंकराचार्य जी के 12 वर्षीय लड़के के रूप को चित्रित करती है।
आदि शंकराचार्य जी की यात्रा पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक महत्व से भरी हुई है । वह कम उम्र में ही त्याग के मार्ग पर चल पड़े थे। यह मार्ग उन्हें ओंकारेश्वर ले गया, जहां उन्होंने अपने गुरु गोविंद भगवद्पाद के सरंक्षण में चार साल बिताए और गहन शिक्षा प्राप्त की। 12 साल की उम्र में उन्होंने पूरे भारत में एक उल्लेखनीय यात्रा शुरू करने के लिए ओंकारेश्वर छोड़ दिया। अव्दैत वेदांत दर्शन की गहन शिक्षाओ का प्रसार किया और रास्ते में अनगिनत व्यक्तियों को प्रबुद्ध किया।
कौन थे शंकराचार्य जी?
शंकराचार्य जी एक दार्शनिक थे जो लगभग 788 से 820 ई.पू. तक जीवित रहे। शंकराचार्य जी का जन्म 788 ई. में दक्षिण भारतीय राज्य केरल के एक छोटे से गांव में हुआ था । हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार इनको भगवान शंकर का अवतार माना जाता है। इन्होंने लगभग पूरे भारत की यात्रा की और इनके जीवन का अधिकांश भाग उत्तर भारत में बीता। चार पीठों (मठ) की स्थापना करना इनका मुख्य रूप से उल्लेखनीय कार्य रहा, जो आज भी मौजूद है। शंकराचार्य को भारत के ही नहीं अपितु सारे संसार के उच्चतम दार्शनिकों में महत्व का स्थान प्राप्त है। उन्होंने अनेक ग्रन्थ लिखे हैं, किन्तु उनका दर्शन विशेष रूप से उनके तीन भाष्यों में, जो उपनिषद, ब्रह्मसूत्र और गीता पर हैं, मिलता है।
शंकराचार्य जी की धार्मिक मान्यताएं
वह हिंदू आस्था के कट्टर रक्षक थे। उन्हें भारत को एकजुट करने का श्रेय दिया जाता है। शंकराचार्य जी की शिक्षाएँ अव्दैत वेदांत की अवधारणा के इर्द गिर्द घूमती है जो इस बात की वकालत करती है कि केवल एक ही वास्तविकता है और सभी अंतर एक भ्रम है।
शंकराचार्य जी का मुख्य दर्शन
शंकराचार्य जी का मुख्य दर्शन यह था कि ज्ञान ही एकमात्र ऐसी चीज है जो लोगो को दुख से बचा सकती है ।उनका मानना था की अज्ञानता सभी दुखों की जड़ है और मनुष्य केवल ज्ञान प्राप्त करके ही सच्चा सुख पा सकता है।
आदि शंकराचार्य जी की 108 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण
सीएम शिवराज और देश भर से आए साधु संतों और अवधेशानंद महाराज की मौजूदगी में 21 सितंबर 2023 को ओंकारेश्वर में आदि योगी शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा अनावरण किया.
इस दौरान देशभर से आमंत्रित शैव परम्परा के लगभग 350 लोक कलाकारों ने अपनी-अपनी शैलियों में नृत्य प्रस्तुतियां भी दीं. सीएम शिवराज ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा, ''एकात्मता की प्रतिमा दुनिया को शांति का संदेश देगी. इसी भाव से आचार्य श्री की प्रतिमा लगी है ।
Statue of Oneness’ of Adi Shankaracharya
एकात्माता धाम के शकर संग्रहालय में क्या क्या होगा ?
शंकर संग्रहालय के अंतर्गत आचार्य शंकर के जीवन दर्शन व सनातन धर्म पर विभिन्न वीथिकाएं, दीर्घाएं, लेजर लाइट वॉटर साउंड शो, आचार्य शंकर के जीवन पर फिल्म, सृष्टि नाम का अद्वैत व्याख्या केंद्र, एक अद्वैत नर्मदा विहार, अन्नक्षेत्र, शंकर कलाग्राम प्रमुख आकर्षण रहेंगे।
आचार्य शंकर अंतर्राष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान के अंतर्गत दर्शन, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान तथा कला पर केंद्रित चार शोध केंद्रों के अलावा ग्रंथालय, विस्तार केंद्र तथा एक पारंपरिक गुरुकुल भी होगा। संपूर्ण निर्माण पारंपरिक भारतीय मंदिर स्थापत्य शैली में किया जा रहा है। यह प्रकल्प पर्यावरण अनुकूल होगा। अद्वैत लोक के साथ ही 36 हेक्टेयर में अद्वैत वन नाम का एक संघन वन विकसित किया जा रहा है।
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