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South Africa Dominates England in First ODI: Markram's Blitz and Maharaj's Spin Lead to Historic Win

  🏏 Match Overview: South Africa 's Commanding Victory In a remarkable display of skill and strategy, South Africa defeated England by 7 wickets in the first ODI at Headingley, Leeds , on September 2, 2025. Chasing a modest target of 132, South Africa reached 137/3 in just 20.5 overs, with 175 balls to spare. This victory marks a significant achievement, as it was South Africa's first-ever ODI win at this venue. 🔥 Aiden Markram's Record-Breaking Innings South Africa's vice-captain, Aiden Markram , delivered a blistering performance, scoring 86 runs off just 55 balls. His innings included a record-setting 23-ball half-century, the fastest by a South African opener in ODIs. Markram's aggressive approach set the tone for the chase, ensuring a swift and decisive victory. 🧙‍♂️ Keshav Maharaj's Spin Magic Spinner Keshav Maharaj was instrumental in dismantling England's batting lineup, taking 4 wickets for 22 runs. His tight lines and variations...

नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल जानकरी - Nari Shakti Vandan Adhiniyam

महिला आरक्षण क्या है?

महिला आरक्षण विधेयक, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता हैं।

महिला आरक्षण बिल का नाम “नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल” रखा गया है।

इस विधेयक के तहत महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित होगी। इस बिल को 128 वें संविधान संशोधन विधेयक के तहत पेश किया गया। इस बिल का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण को मजबूत करना है।

 लोकसभा और राज्यसभा दोनो में पारित होने के बाद यह बिल जब सहमति के लिए राष्ट्रपति के पास जायेगा और फिर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण आधिकारिक हो जायेगा।


Nari Shakti Vandan Adhiniyam

नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल से जुड़ी मुख्य बातें :-

लोकसभा और राज्य सभा में निर्विरोध पास हुआ महिला आरक्षण बिल नए संसद भवन में पारित होने वाला यह पहला विधेयक है।

इस बिल पर वोटिंग के दौरान कोई हंगामा नही हुआ।

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए   33% आरक्षण एक कानून बनेगा ।

पांच दिवसीय विशेष सत्र के दौरान नई संसद में ध्वनि मत से महिला आरक्षण विधेयक पारित किया गया।

इस बिल को करीब 454 सांसदों के समर्थन से पारित किया गया।

केवल दो सांसदों ने इसे के खिलाफ वोट किया।

संसद के विशेष सत्र के चौथे दिन महिला आरक्षण बिल को राज्यसभा में डिबेट के लिए पेश किया गया।

केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि परिसीमन और जनगणना दोनो अगले साल के आम चुनाव के बाद शुरू होगी।

इस बिल को लाने का यह पांचवा प्रयास था।

महिला आरक्षण विधेयक की पहल यूपीए सरकार ने की थी।

पहली बार महिला आरक्षण विधेयक को 12 सितंबर 1996 को पेश किया गया था।

संसद में यह बिल पिछले 27 वर्षों से लटका हुआ था।

इस समय महिला सांसदों की संख्या 82 है,इस बिल के कारण संख्या 181 हो जायेगी।


इस संशोधन अधिनियम के लागू होने के 15 वर्ष बाद महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण समाप्त हो जायेगा।


आवश्यक्ता क्या है?

सरकार के आर्थिक सर्वेक्षणों में यह माना जाता है की लोकसभा और विधानसभाओं में महिला प्रतिनिधियों की संख्या बहुत कम है।

गलोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2021 के अनुसार , राजननीतिक सशक्तिकरण सूचकांक में भारत के प्रदशन में गिरावट आई है और महिला मंत्रियों को संख्या वर्ष 2019 के 23.1% से घट कर वर्ष 2021 में 9.1% तक पहुंच गई है।


पीएम नरेंद्र मोदी ने दी बधाई :

बिल के राज्य सभा की बाधा पार होने के बाद पीएम मोदी ने बधाई दी और इसे भारत के इतिहास में एक निर्णायक क्षण बताया।

आगे पीएम मोदी ने कहा संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित होने के साथ हम भारत की महिलाओं के लिए मजबूत प्रतिनिधित्व और सशक्तिकरण के युग की शुरुआत करते है ।  यह ऐतिहासिक कदम यह सुनिचित करने की प्रतिबद्धता है की उनको आवाज़ और भी प्रभावी ढंग से सुनी जाएगी।


कब-कब राजनीति विषय बना महिला आरक्षण बिल :

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने 1998 में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को पेश किया था। कई दलों के सहयोग से चल रही वाजपेयी सरकार को इसको लेकर विरोध का सामना करना पड़ा।

इस वजह से बिल पारित नहीं हो सका . वाजपेयी सरकार ने इसे 1999,2002, और 2003-2004 में भी पारित कराने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुई।

यूपीए सरकार ने 2008 में इसे बिल को 108वे संविधान संशोधन विधेयक के रूप में राज्य सभा में पेश किया। यहां यह बिल 9 मार्च 2010 को भरी बहुमत से पारित हुआ । बीजेपी, वाम दलों और जेडीयू ने बिल का समर्थन किया।

यूपीए सरकार ने इसे बिल को लोकसभा में पेश नहीं किया।

इसका विरोध करने वालो में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल शामिल थी।

ये दोनो दल यूपीए का हिस्सा थे । कांग्रेस को दर था की अगर उसने बिल को लोकसभा में पेश किया तो उसकी सरकार खतरे में पड़ सकती है।

2008 में इस बिल को कानून और न्याय संबंधी स्थायी समिति को भेजा गया था। इस के दो सदस्य वीरेन्द्र भाटिया और शैलेंद्र कुमार सजवादी पार्टी के थे।

उन्होंने कहा कि वे महिला आरक्षण के विरोधी नहीं है लेकिन जिस तरह से बिल तयार किया गया उसे से वह सहमत नही थे । इन दोनो सदस्यों को मांग थी कि हर राजनीतिक दल अपने 20 फीसदी टिकट महिलाओं को दे और महिला आरक्षण 20 फिसदी से जायदा ना हो।

साल 2014 में लोकसभा भंग होने के बाद यह बिल अपने आप खत्म हो गया,लेकिन राज्य सभा स्थायी सदन है इसलिए ये बिल आज भी जीवित है।

अब इसे लोक सभा में नए सिरे से पेश किया गया।अगर लोक सभा इसे पारित कर दे तो राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा।

कानून बन ने के बाद 2024 के चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिल जायेगा।



विरोध किन्होंने किया?

नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोक सभा में दो तिहाई बहुमत से पारित हो गया है, विधेयक के पक्ष में रिकॉर्ड 454 वोट पड़े जबकी बिल के विरोध में सिर्फ 2 मत पड़े।

इस बिल का विरोध AIMIM के दोनो सांसदों ने किया। पार्टी प्रमुख और हैदराबाद से संसद असदुदीन ओवैसी और औरंगाबाद से सांसद इम्तियाज जलील ने महिला आरक्षण बिल के खिलाफ वोट किया

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