Ancient Temples Of India: हजारों साल पुराने हैं भारत के ये मंदिर, वास्तुकला देख उड़ जाएंगे होश
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भारत के प्राचीन मंदिर :-
भारत एक प्राचीन देश है। यहाँ काफी प्राचीन धार्मिक स्थान है जिनका इतिहास भी काफी पुराना है। भारत में वैसे तो अनेको मंदिर है जिनका इतिहास और मंदिरो से जुड़ी आस्था अभ्दुत है लेकिन कई ऐशे मंदिर भी है जो एक हजार साल से भी ज्यादा पुराने है।
आज के इस लेख में हम आपको बताने जा रहे है भारत के सबसे पुराने मंदिरो के विषय में :-
1.मुंडेश्वरी मंदिर , बिहार
यह मंदिर पंवरा पहाड़ी के शिखर पर स्थित है I जिसकी ऊँचाई लगभग 600 फीट है Iवर्ष 1812 ई0 से लेकर 1904 ई0 के बीच ब्रिटिश यात्री आर.एन.मार्टिन, फ्रांसिस बुकानन और ब्लाक ने इस मंदिर का भ्रमण किया था । मां मुण्डेश्वरी मंदिर में भगवान शिव का एक पंचमुखी शिवलिंग है, जिसके बारे में बताया जाता है कि इसका रंग सुबह, दोपहर व शाम को अलग-अलग दिखाई देता है। देखते ही देखते कब पंचमुखी शिवलिंग का रंग बदल जाता है, पता भी नहीं चलता।
2. जगत मंदिर, गुजरात
गुजरात का द्वारका शहर वह स्थान है जहाँ 5000 वर्ष पूर्व भगवान कृष्ण ने मथुरा छोड़ने के बाद द्वारका नगरी बसाई थी।
जिस स्थान पर उनका निजी महल ‘हरि गृह था .वहाँ आज प्रसिद्ध जगद मंदिर द्वारकाधीश है। द्वारकाधीश मंदिर को जगत मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर द्वारकाधीश की पूजा की जाती है जिसका अर्थ ‘द्वारका का राजा’ है।
3. सोमनाथ मंदिर, गुजरात
गुजरात प्रांत के काठियावाड़ क्षेत्र में समुद्र के किनारे सोमनाथ नामक विश्वप्रसिद्ध मंदिर में 12 ज्योतिर्लिंगों से एक स्थापित है। पावन प्रभास क्षेत्र में स्थित इस सोमनाथ-ज्योतिर्लिंग की महिमा महाभारत, श्रीमद्भागवत तथा स्कंद पुराणादि में विस्तार से बताई गई है। चन्द्रदेव का एक नाम सोम भी है। उन्होंने भगवान शिव को ही अपना नाथ-स्वामी मानकर यहां तपस्या की थी इसीलिए इसका नाम 'सोमनाथ' हो गया।कहते हैं कि सोमनाथ के मंदिर में शिवलिंग हवा में स्थित था। यह एक कौतुहल का विषय था। जानकारों के अनुसार यह वास्तुकला का एक नायाब नमूना था। इसका शिवलिंग चुम्बक की शक्ति से हवा में ही स्थित था। सर्वप्रथम इस मंदिर के उल्लेखानुसार ईसा के पूर्व यह अस्तित्व में था। इसी जगह पर द्वितीय बार मंदिर का पुनर्निर्माण 649 ईस्वी में वैल्लभी के मैत्रिक राजाओं ने किया। पहली बार इस मंदिर को 725 ईस्वी में सिन्ध के मुस्लिम सूबेदार अल जुनैद ने तुड़वा दिया था। फिर प्रतिहार राजा नागभट्ट ने 815 ईस्वी में इसका पुनर्निर्माण करवाया।
4. ब्रह्देश्वर मंदिर, तमिलनाडु
बृहदीश्वर मन्दिर या राजराजेश्वरम् तमिलनाडु के तंजौर में स्थित एक हिंदू मंदिर है जो 11वीं सदी के आरम्भ में बनाया गया था। इसे पेरुवुटैयार कोविल भी कहते हैं। यह मंदिर पूरी तरह से ग्रेनाइट निर्मित है। विश्व में यह अपनी तरह का पहला और एकमात्र मंदिर है जो कि ग्रेनाइट का बना हुआ है। बृहदेश्वर मंदिर चोल वास्तुकला का शानदार उदाहरण है, जिनका निर्माण चोल शासक महाराजा राजराज प्रथम के राज्य के दौरान केवल 5 वर्ष की अवधि में (1004 ई. और 1009 ई. के दौरान) निर्मित किया गया था। उनके नाम पर ही इसे राजराजेश्वर मन्दिर नाम भी दिया गया है। राजाराजा प्रथम भगवान शिव के परम भक्त थे जिस कारण उन्होंने अनेक शिव मंदिरों का निर्माण करवाया था जिनमें से एक बृहदेश्वर मंदिर भी है।
5. वंकटेश्वर मंदिर, आंध्र प्रदेश
वेंकटेश्वर मन्दिर आन्ध्र प्रदेश के चित्तूर ज़िले के तिरुपति में स्थित है। तिरुमला के सात पर्वतों में से एक वेंकटाद्रि पर बना श्री वेंकटेश्वर मन्दिर यहाँ का सबसे बड़ा आकर्षण का केन्द्र है। इसलिए इसे सात पर्वतों का मन्दिर के नाम से भी जाना जाता है।मंदिर का निर्माण दक्षिण भारतीय वास्तुकला में किया गया है और माना जाता है कि इसका निर्माण 300 ईस्वी पूर्व की अवधि में हुआ था। चूँकि भगवान वेंकटेश्वर को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है, इसलिए धारणा है कि प्रभु श्री विष्णु ने कुछ समय के लिए तिरुमला स्थित स्वामी पुष्करणी नामक तालाब के किनारे निवास किया था। मन्दिर से सटे पुष्करणी पवित्र जलकुण्ड के पानी का प्रयोग केवल मन्दिर के कार्यों, जैसे भगवान की प्रतिमा को साफ़ करने, मन्दिर परिसर का साफ़ करने आदि के कार्यों में ही किया जाता है। इस कुण्ड का जल पूरी तरह से स्वच्छ और कीटाणुरहित है।
6. शोर मंदिर, महाबलीपुरम
शोर मंदिर को दक्षिण भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है जिसका संबंध आठवीं शताब्दी से है। यह पाँच मंज़िला मंदिर है, इसका पिरामिड संरचना 60 फुट ऊंची है और एक 50 फुट वर्ग में फैला हुआ है। शोर मंदिर के भीतर तीन मंदिर हैं। बीच में भगवान विष्णु का मंदिर है इसके दोनों तरफ शिव मंदिर हैं। महाबलीपुरम में स्मारकों के समूह के रूप में, यह एक यूनेस्को विश्व विरासत स्थल के रूप में वर्गीकृत किया गया है। मंदिर से टकराती सागर की लहरें एक अनोखा दृश्य उपस्थित करती हैं। इसके निर्माण के समय, पल्लव वंश के नरसिंहवर्मन द्वितीय के शासनकाल के दौरान यह स्थल एक व्यस्त बंदरगाह था ।
7. सूर्य मंदिर , कोणार्क
ओडिशा के पुरी जिले में स्थित कोणार्क सूर्य मंदिर वास्तुकला की दृष्टि से तो हैरान करता ही है। साथ ही इसका अध्यात्म की दृष्टि से भी विशेष महत्व है। यह मंदिर सूर्य देव को समर्पित है। हिंदू धर्म में सूर्य देव को सभी रोगों का नाशक माना गया है। अपनी कई खासियत के चलते इस मंदिर ने यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर स्थल में अपनी जगह बनाई है।कोणार्क शब्द, 'कोण' और 'अर्क' शब्दों के मेल से बना है। अर्क का अर्थ होता है सूर्य, जबकि कोण से अभिप्राय कोने या किनारे से रहा होगा। प्रस्तुत कोणार्क सूर्य-मन्दिर का निर्माण लाल रंग के बलुआ पत्थरों तथा काले ग्रेनाइट के पत्थरों से हुआ है। इसे १२३६–१२६४ ईसा पूर्व गंग वंश के तत्कालीन सामंत राजा नृसिंहदेव द्वारा बनवाया गया था।[2] यह मन्दिर, भारत के सबसे प्रसिद्ध स्थलों में से एक है।
8. ऐरावतेश्वर मंदिर, तमिल नाडु
ऐरावतेश्वर मंदिर दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य के कुंभकोणम के पास 3 किमी की दूरी पर स्थित है। ये मंदिर शिव भगवान को समर्पित है, जिसे 12 वी शताब्दी में बनाया गया था। मंदिर न केवल अपने धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है, बल्कि ये प्राचीन बास्तुक्ला के लिए भी प्रसिद्ध है। मंदिर की आकृति और अंदर बनी मंदिर की डिजाइनिंग लोगों को काफी आकर्षित करती है। अगर इसके इतिहास पर गौर करे तो इसे राजा राज चोल द्वितीय ने बनवाया था।
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यहां की सीढ़ियों से संगीत की धुन निकलती है, जिस वजह से ये मंदिर अन्य मंदिरों से काफी अलग है।
9. लिंगराजा मंदिर, भुवनेश्वर
लिंगराज मंदिर शिव कोसमर्पितएक हिंदू मंदिर है और यह भारत के ओडिशा राज्य की राजधानी भुवनेश्वर में सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भुवनेश्वर शहर का सबसे प्रमुख स्थल और राज्य के प्रमुख पर्यटक आकर्षणों में से एक है।11वीं शताब्दी में निर्मित लिंगराज मंदिर, भगवान शिव को समर्पित मंदिर है इसे भुवनेश्वर (ओडिशा) शहर का सबसे बड़ा मंदिर माना जाता है।
ऐसा माना जाता है कि इसका निर्माण सोमवंशी राजा ययाति प्रथम (Yayati I) ने करवाया था।
यह लाल पत्थर से निर्मित है जो कलिंग शैली की वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
मंदिर को चार वर्गों में विभाजित किया गया है -
o विमान (गर्भगृह युक्त संरचना)
o यज्ञ शाला (प्रार्थना के लिये हॉल)
o भोग मंडप (प्रसाद हेतु हॉल)
o नाट्य शाला (नृत्य के लिये हॉल)।
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